Monday, April 4, 2011

उसका हाथ मांगनें के लिए

मैं  न जाने  इतना  क्यूँ  सोचता  रहता  हूँ . मेरा  दिन  भर उन  लोगो  को  सोचने  में बर्बाद हो जाता है ,जो शायद मेरे बारे में  भूल  कर  भी नहीं  सोचते होंगे.  मैं  आसमान  में उड़ते  उस हवाई जहाज के बारे  में  भी सोचता हूँ ,जिसके  पाइलेट का  अगर बस  चले तो मेरे मुँह पर  ही थूक  दे.
                                                              मै उस लड़के के बारे में भी सोचता हूँ जो मेरे साथ 10 वी में पड़ता था.वो हमेशा एक जैकेट पहने रहता था जिस पर N लिखा होता था लेकिन उसका नाम  R से शुरू होता था.वो हमेशा शराब के नशे में डूबा रहता था.उसकी पढ़ी -लिखी माँ अपना चश्मा साफ़  करते हुए कोचिंग पढ़ाते टीचर के पास आती है,और उस लड़के को समझाइश देने के लिए कहती है. जब टीचर  समझाते हुए, उस नशे में डूबे  बच्चें का हाथ अपने हाथ में लेते है तो वो देखते है की  उसकी आस्तीन के नीचे कलाई से लेकर कोहनी तक एक नाम लिखा है जो शायद उस लड़के ने चाक़ू से अपनी चमड़ी को काट कर लिखा है. ये नाम उस लड़की का पूरा नाम है जिसका पहला अक्षर उसकी जैकेट पर लिखा है .और ये वही लड़की है जो उससे  प्यार नहीं करती क्योंकि वो बदसूरत है.
                                                          मैं उस लड़की के बारे में भी सोचता हूँ ,जो पंडीत जी के घर के पीछे रहती थी. पंडितजी का घर मेरे नाना जी के घर के सामने था. नानाजी का घर उस नदी के पीछे  था, जो गाँव की इकलौती नदी थी,लेकिन अब सुख गयी है. मैं जब भी बचपन में गर्मी की छुट्टियों में वहाँ जाता था तो वो पंडित जी  हमेशा मुझे चिढ़ाते हुएँ मेरा रिश्ता उस लड़की के साथ तय करने की बातें करते थे, वो कहते थे की वो मुझे अपने साथ उस लड़की के घर ले जाकर  उसका हाथ मांगेंगे और मैं  चिढ़ जाता था. वो लड़की मेरी हमउम्र थी और वहाँ रहती थी जहाँ का वर्णन मैंने ऊपर किया है. वो लड़की बहुत हँसती थी अब नहीं हँसती,बहुत बोलती थी अब अब नहीं बोलती. क्योकि  उसके घर के सामने रहने वाले  एक  अमीर किसान के बेटें नें उसके बचपन का बलात्कार कर दिया है. उस लड़की का बाप सिवाय मर जाने के और कुछ ना कर सका. जब मैं इतने सालों बाद वहाँ गया तो मैंने देखा की वो लड़की वहाँ नहीं हैं. काश ! होती तो मैं उन्ही पंडित जी को लेकर उस लड़की के घर चला जाता,उसका हाथ माँगने के लिए.
                                   (यह वास्तविकताओ पर आधरित  कल्पनिक घटनाएँ है )

1 comment:

Anonymous said...

nice.............