Saturday, April 2, 2011

वो दिल खाती हैं

झूट कहती हें कुछ लड़किया
की वे शकाहारी हें 
हर दिन सुबह 
नाश्ते में 
एक पागल दिल खाया करती हें 
झूट कहते हें कुछ पति 
की वे अपनी पत्नियों से 
प्यार करते हें 
उनकी पत्नियों की 
औकात 
एक गोल तकिये  से ज्यादा नहीं हें 
जो पड़े रहते थे बगलों में उन दिनों 
जिन दिनों 
कुंवारापन 
बिस्तर की सिलवटे चूमता था 

झूट कहते हें कुछ पागल प्रेमी  
के वे सच्चे प्यार की तलाश में हें 
सच्चा प्यार तब से बेठा हें कही
कोने  में
चार रुपैये की
चूहामार  दवाई खा कर
जब से उसे
पछतावा हुआ हें 
अपने उस एक रात के प्यार पर  
 


4 comments:

GOURAV KULKARNI said...

nice one..................gourav

Anonymous said...

nice....

पंकज देवड़ा (Pankaj Devda) said...

thanx Gourav

SANDEEP CHOUDHARY said...

bhai likhe jaa bahot sahi jaa raha h ...........