Tuesday, August 24, 2021

कहानी - लाल साड़ी वाली

 मेरी नींद खुली और मैंने देखा कि वो मेरे ऊपर बैठी है,लाल साड़ी और खुले बालों में वो इतनी खूबसूरत लग रही थी जैसे किसी ने लाल तपा हुआ लोहा भट्ठी से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया हो l

उसने अपनी उंगलियों से मेरा चेहरा सहलाया और इसके बाद वो अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब लेकर आ गई । उसने अपनी आंखें मेरी आंखों में गाड़ दी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी आंखों को चीरते हुए मेरी रूह में उतरने की कोशिश कर रही हो ।

दरअसल, ये रात की 3:00 के आसपास की घटना है और इसका शुरुआती सिरा इसी रात की 9:00 बजे के आस पास बंधा है जब मैं इस उज्जैन शहर की एक सड़क से होता हुआ अपने रिश्तेदार से मिलने जा रहा था, तभी मुझे पता चला कि अचानक से लोग हल्ला मचाते हुए जान बचाकर भागने लग गए हैं ।

हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क चुके थे और एक हत्यारी भीड़ दौड़ती हुई मेरी तरफ आ रही थी। मैं उससे बचने के लिए मुख्य सड़क को छोड़कर गलियों से होता हुआ एक घर की पिछली दीवार को फांद कर वहां आंगन में बनी टॉयलेट के सामने हांफता हुआ बैठ गया । और तभी मैंने देखा कि उस टॉयलेट का दरवाजा खुला और वो लाल साड़ी वाली औरत मेरे सामने खड़ी हो गई ।

मेरे बोलने से पहले ही वो सारा माजरा समझ चुकी थी ।  इसलिए उसने इशारा करके मुझे घर के अंदर बुलाया और कमरे में जाने को कहा । वहां रखे एक पलंग पर जाकर मैं लेट गया और मैंने देखा कि वह लाल साड़ी वाली महिला अपनी छोटी सी बच्ची को लेकर दूसरे कमरे में चली गई है ।

उस काली रात के घूप्प अंधेरे में घुलती हुई उस छोटे से बल्ब की रोशनी के सहारे मैं अपनी पुरानी यादों में उतर गया । 

अब से 8 साल पहले जब मैं 22  का था तब मैं अपने पास ही के एक गांव की लड़की से इश्क कर बैठा । वो इतनी सुंदर थी कि मैं जब भी उसे देखता था तो मुझे पहली बार देखने जितना ही रोमांच अनुभव होता था ।

क्योंकि हमारी जातियां अलग-अलग थी इसलिए मैंने घर से भागने का निर्णय लिया। वह भागना नहीं चाहती थी लेकिन मैंने उससे कहा कि उसे अपने परिवार और मेरे बीच किसी एक को चुनना होगा ।

और अगली रात जब सब लोग सोए थे तब चुपके से अपने परिवार को छोड़कर वह मेरे साथ भाग गई। हमने इंदौर जाकर एक मंदिर में शादी की और एक सस्ते होटल में ठहरने का निर्णय लिया ।

चूंकि मैंने अपनी प्रेमिका को कभी नहीं छुआ था इसलिए शादी के बाद मिलन की इस सुनहरी रात के लिए मैं काफी उत्साहित था लेकिन वह उतनी हीं घबराई हुई थी। परिवार को छोड़ने की उदासी उसके चेहरे पर पसरी हुई थी । उसकी आंख के आंसू टूटने का नाम भी नहीं ले रहे थे और मेरे समझाने पर वह ना चाहते हुए भी मिलन के लिए तैयार हो गई ।

मैं जितना उस सुनहरी रात को यादगार बनाना चाहता था, वह रात उससे भी ज्यादा यादगार होने के लिए  तरस रही थी। दरअसल हुआ यूं कि जब मैं उससे प्यार कर रहा था तब मैंने पाया कि कुंवारेपन के देवता का टूटा हुआ दूत अपना लाल संदेशा लेकर नहीं आया है और इसी बात पर मुझे अपनी पत्नी बन चुकी प्रेमिका की वफा पर शक हुआ। मुझे लगा कि वह मुझसे पहले किसी अन्य पुरुष के साथ अपना कौमार्य खो चुकी है ।

और इस बात पर मैं भड़क गया। मैंने उसके चरित्र पर उंगली उठाई और उसे गंदी-गंदी गालियां दी । उसने लाख कसमें खाई कि उसने मेरे सिवा कभी किसी को छुआ भी नहीं है लेकिन मैं उसकी बात मानना नहीं चाहता था क्योंकि मेरी मर्दानगी इस बात की इजाजत नहीं देती थी कि मैं किसी जूठन का उपभोग करूं ।

अंततः मैं उसे उसके गांव छोड़कर भाग गया । वो बहुत रो रही थी कि मेरे छोड़ देने के बाद लोग उसे ताने मार मार कर उसका जीना बेहाल कर देंगे। समाज तो क्या उसे उसका परिवार भी नहीं अपनाएगा लेकिन मैंने उसकी एक भी बात नहीं सुनी और उस दिन के बाद मुझे नहीं पता कि मेरी पत्नी का क्या हुआ ?

मुझे बाद में पता चला कि जब लड़कियां ज्यादा साइकिल चलाती है या खेलों में एक्टिव रहती है तो ऐसा हो सकता है कि कौमार्य टूटने का संकेत नहीं आए। मेरी पत्नी को भी साइकिल चलाने का बहुत शौक था लेकिन मैं उसे बेवफा मानना ज्यादा पसंद करूंगा क्योंकि इससे मेरे निर्णय को सही ठहराना आसान हो जाता है  और साथ ही मेरा जीना भी।

खैर, मैं नींद में डूबते उतराते हुए अपने पुराने जीवन की घटनाओं के बारे में सोच ही रहा था, तभी मुझे लगा कि कोई मेरे ऊपर बैठा हुआ है । मैंने आंखें खोली, देखा तो पाया कि वही लाल साड़ी वाली औरत मेरे ऊपर बैठी है जिसने मुझे बचाया था ।

उसने अपनी उंगलियों से मेरा चेहरा सहलाया और इसके बाद उसने अपनी अंगुलियां मेरे मुंह पर रख दी और वह अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब ले आई ।

और हां मैं यह बताना तो भूल ही गया कि यह लाल साड़ी वाली औरत मेरी वही बीवी है जिसे मैं 8 साल पहले छोड़कर भाग चुका था ।

उसने अपनी आंखें मेरी आंखों में गड़ा दी और जब मुझे लगा कि वह मुझे चूम कर इस काली रात को सुनहरा कर देगी तभी उसने चमकता हुआ खंजर मेरी छाती में गाड़ दिया । रक्त के फव्वारे छूट रहे थे और मेरे लाल रक्त से उसकी लाल साड़ी और ज्यादा सुर्ख हो गई थी ।   

 उसने वह खंजर निकाला और फिर कहा-
" उस दिन तेरे छोड़ने के बाद मैं पल पल कितनी मरी हूं इस बात का एहसास, एक बार मरने से नहीं होगा तुझे । अगर मेरा बस चले तो मैं तुझे बार-बार जिंदा करके मार दूं ।

और हां तुझे चमकता लाल खून बहुत पसंद है ना ?  देख तेरी छाती से कितना खून बह रहा है ! एकदम पवित्र और इतना कुंवारा जितना तूने कभी चाहा था ।"

और इसके बाद उसने वो खंजर मेरी छाती में गाड़ दिया ।

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