रातें इतनी सर्द हुई है,
कि सांसे आती बर्फ हुई है ।
सुलगा दिए है मैंने दिन सारे,
हथेलियों में रगड़ रगड़ कर,
राख-अंगार कर दिए है कुछ तारे ।
अब तुम्हारे कंधे से फिसलती धूप का,
एक कतरा मेरी उंगलियों पर मल दो ।
तुम्हारी बाहों में जो मुलायम भेड़ें है,
उनके बीच मुझे मेमने सा रख लो l
- पंकज देवड़ा
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