वह लड़का और लड़की जब एक दूसरे को बांहों में भरते थे तो लगता था कि जैसे एक दूसरे के शरीरों को तोड़कर रूहों में जा धसेंगे ।
हर बार उनका एक दूसरे से मिलना पहली बार मिलने जितना रोंगटे खड़े कर देने वाला था। हर बार उनका एक दूसरे को चूमना पहली बार चूमने जितना निर्दयी था ।
वे जब एक दूसरे को चूमते थे तो होंठों को लहूलुहान कर देने की हद तक पहुंच जाते थे । उनके होठों से रिसने वाला खून जब उनकी गर्दनों और छातियों पर रिसता था तो लगता था कि जैसे अजंता की गुफाओं के भित्ति चित्र उकेर दिए गए हो ।
लड़का और लड़की मिलना चाहते थे, किसी ऐसी जगह पर जहां लोगों के हाथ लड़के की गर्दन और लड़की की छाती तक ना पहुंच सके । तभी लड़की ने कहा कि उसके मां-बाप किसी दूसरे शहर जा रहे हैं और वह चुपके से उसके घर मिलने आ सकता है ।
लड़का खुश हो गया और रात को चुपके से लड़की के घर पहुंच गया । उसका लड़की के पड़ोसियों से आंख बचाकर जाना उतना ही चुपके से था जितने 'चुपके' का सहारा लेकर उन पड़ोसियों के बच्चे के किन्ही और पड़ोसियों से बचकर प्यार करने जाते थे ।
उनके बच्चों का प्यार करना जिंदा रहने के लिए जरूरी था क्योंकि वक्त इतना खराब था कि नाक के आगे दो अंगुल तक कि अपने हिस्से की सांसे बचाए रखना भी बहुत मुश्किल था ।
लड़की ने लड़के को घर के अंदर घुसाया और फिर बाल बांधने लगी । वह हर बार ऐसा ही करती थी । वह जब भी लड़के के सामने होती अपने दोनों हाथ उठाकर अपने बाल पीछे की ओर बांधने का नाटक करती थी।
लड़की हमेशा स्लीवलेस पहनती थी इसलिए बाल बांधते हुए उसकी बगले इतनी सुंदर लगती थी कि लड़का खरगोश बनकर उनमें छुप जाना चाहता था ।
लड़के ने कहा कि उसे भूख लगी है और वह प्यार करना चाहता है । वह लड़की की गर्दन पर गर्म सांस बनकर तैरना चाहता है । उसकी नाभि के आसपास गुदगुदी बनकर रेंगना चाहता है । उसके होठों पर नमी बन कर खुद को लीप देना चाहता है ।
इसके बाद दोनों ने एक दूसरे से प्यार करना शुरू किया । इस अंधेरी रात में लड़की किसी नदी की तरह बह रही थी और वह लड़का किसी पत्ते पर रखे जलते दिए की तरह उसके प्रवाह में बहता जा रहा था ।
तभी उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई उनका दरवाजा तोड़ रहा हो और थोड़ी ही देर में 30-40 लोगों की भीड़ उस लड़की के घर में घुस गई । वह सब मर्द थे और शोर मचा रहे थे । जोर-जोर से गालियां दे रहे थे । उन्होंने लड़की को ऐसी गाली दी जो वेश्या से मिलती-जुलती थी ।
भीड़ ने कहा कि उनकी महान संस्कृति इतनी भंगुर है कि एक लड़के और लड़की के शरीरों के घिसड़ने मात्र से भरभरा कर ढह जाएगी । इसलिए उनके शरीरों को टूटना होगा ।
लड़की ने कहा कि उसका शरीर कोई धर्मस्थल नहीं है जिसे तोड़े बगैर महान संस्कृति या मजहब की रक्षा नहीं की जा सकेगी ।
इसके बाद लड़का और लड़की अपनी जिंदगी की भीख मांगने लगे पर भीड़ नहीं मानी उन्होंने कहा कि उन दोनों की छातियों को चीर कर उनके दिल किसी धार्मिक किताब में रख दिए जाएंगे या फिर अशोक के पत्तों के साथ तोरण में बांधकर घर के आगे लटका दिए जाएंगे ताकि प्रेम जैसी बुरी चीज उनके सभ्य घरों की चौखट को लांघ ना सके ।
भीड़ उन दोनों को मारने लगी उनके हड्डियों के टूटने की आवाज़े ऐसी आ रही थी मानो कमरे में कोई यज्ञ चल रहा हो और उस यज्ञ में लकड़ियां जलते हुए टूट रही हो । रक्त घी की तरह बह रहा था और दीवारें उनके रक्त से ऐसी रंग गई थी जैसे किसी ने ना समझ में आने वाली लिपि से कोई श्लोक लिखे दिए हो ।
कुछ 15-16 साल के लड़के संस्कृति और देश की जय के नारे लगा रहे थे और साथ ही साथ मौत की ओर बढ़ती हुई उस लड़की के स्तनों और जांघों को छू रहे थे ताकि वे मृत्यु को अपनी उंगलियों पर मल सके और जब बहुत सालों बाद जब वे लड़के बूढ़े और अमर होंगे तब यही मृत्यु का स्पर्श उन्हें गर्माहट प्रदान करेगा ।
उनको मारते हुए भीड़ ने पड़ोस की दादी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने लड़के को छुपते छुपाते जाते हुए देख लिया था वरना आज उनके मिलन के पश्चात उत्पन्न होने वाले पसीने की गंध से समूची संस्कृति का दम घुट सकता था ।
लोग उन दोनों को जल्दी से मार देना चाहते थे ताकि वे घर जाकर चाय पिए और अपनी बीवियों को चूमे और फिर अपने बच्चों को सिखाएं कि कैसे अपनी संस्कृतियों को बचाया जाए ।
साथ ही साथ वे अपने राजनैतिक ईश्वराें के सामने सिर झुकाना चाहते थे ताकि उन्हें बड़ी-बड़ी नौकरियों से नवाजा जाए और उन्हें अमरता का आशीर्वाद दिया जाए ।
पर ऐसा हो ना सका और भीड़ की उम्मीदों पर पानी फिर गया । कुछ पुलिस वाले वहां पहुंच गए और उन्हें भीड़ को खदेड़ते हुए लड़के और लड़की को अस्पताल पहुंचा दिया ।
- पंकज देवड़ा
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