उनकी एड़ियों की दरारों में,
तुम्हारे लहलहाते खेत
धस ना जाए l
छोड़ दो उनके घरों पर कब्जा,
कहीं रूहों को बेदखल कर
वो तुम्हारे जिस्मों में बस ना जाए l
अगर तुम खुदा हो,
तो झुकाए रखो उन्हें तुम्हारे सजदे में l
कहीं उनका सिर उठाना
कोई मजहब नया बन न जाए l
- पंकज देवड़ा
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