Tuesday, August 24, 2021

तुम तोड़ती हो, जोड़ती हो रिवाज हूँ क्या ?

तुम तोड़ती हो, जोड़ती हो
रिवाज हूँ क्या ?

याद करते करते भूल जाती हो
इतिहास हूँ क्या ?

साथ रहती भी हो, कोसती भी
समाज हूँ क्या ?

मेरे हर कहे का, अलग मतलब निकालती हो
किसी मजहब की किताब हूँ क्या ?

- पंकज 

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