इतना अंधेरा भर चुका था उस हृदय में,
कि एक सूरज का जलकर
खाक होना भी कम पड़ गया l
इतना सन्नाटा था वहां,
कि एक विचार,अपने आप को
सुनाने की जद्दोजेहद में मर गया l
सांसे एक दूसरे के क़त्ल में
इतनी व्यस्त थी वहां,
कि अपने आने और जाने के बीच के
खालीपन को जीना भूल गई थी l
- पंकज देवड़ा
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