...और जब कि इस मायावी वक्त में जब न्यूज़ चैनलों पर सरकार के तलवे चाटने वाले दलालों का दबदबा है जो अपनी वफादारी से कुत्तों को भी मात दे दे l
और जो अपने गलों में एक अदृश्य पट्टा डाले हुए दिन रात कुछ इस तरह भोंकते हैं कि उनकी हर भोक में एक नेता महान की चरण वंदना सुनाई देती है l
जिनकी गले से निकलती हुई हर चीख का सिर्फ एक ही मकसद होता है कि सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों का दमन किया जा सके l
जिन्होंने राष्ट्रवाद के नाम पर हिंदुस्तान की रगों में हिंदू मुस्लिम का ऐसा तेजाब फैला दिया है कि इसकी आवाम हर बढ़ते दिन के साथ और भी ज्यादा खूंखार हिंसक कट्टर और एक दूसरे की खून की प्यासी होती जाती है l
ऐसे खूनी असहिष्णु और हिंसक समय में इस अहंकारी सत्ता से हर पल लोहा लेने वाला इसकी आंखों में आंखें डाल कर इसकी गलती बताने वाला एक ऐसा पत्रकार भी मौजूद है जिसने अभी तक भारतीय पत्रकारिता स्तर नीचे गिरने से बचाए रखा है l
ऐसे महान पत्रकार रवीश कुमार को लोकतंत्र की आवाज बनने के लिए रमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया जाना एक भारतीय होने के नाते बड़े गर्व का विषय है आदरणीय रवीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई l
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