तुम चाय बन जाओ यार,
मैं बिस्कुट बन जाता हूं l
अपने तमाम करकरेपन के साथ,
मैं तुममें घुल जाता हूं l
मैं बाटी हूं राख लगी,
आओ मुझे चूर दो l
घी शक्कर बनकर इतना मुझे बुर दो,
कि मैं चूरमा बन जाऊं l
कि मैं तुमसे अपने जर्रे जर्रे को तर कर जाऊं l
और क्या-क्या बने इश्क की इस रसोई में,
चलो सब छोड़ दो l
एक काम करो तुम मुझे बाहों में भरो,
और दम लगाकर तोड़ दो l
- पंकज देवड़ा
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