मैं जल्दी से किसी के प्यार में पागल हो जाना चाहता था पर यह लग्जरी मेरे पास नहीं थी क्योंकि पहला तो यह कि मैं 21 का होते हुए भी 15 साल के बच्चों की सी मासूमियत अपने चेहरे पर लिए हुए घूम रहा था और कॉलेज में रोज-रोज यही मंत्र सिखाया जा रहा था कि लड़कियां लड़कों पर मरती है बच्चों पर नहीं l
और दूसरा यह कि मेरा पहनावा मेरा फैशन सेंस भिखारी होने की हद तक खराब था और कोई चाह कर भी मेरे प्यार में पागल नहीं हो सकता था l
इन सबके बीच, मैं लिखने लग गया था और फिर इस लिखने ने मेरी दोस्ती दो ऐसे क्रांतिकारियों से करवाई जो 2011 कि ठंड में तत्कालीन सरकार के खिलाफ क्रांति की गर्मी पैदा कर रहे थे l मैं उनके लिए लिखने लग गया था l
और फिर तीन चार महीनों बाद मेरे एक रिश्तेदार की शादी हुई और मैं वहां गया l मैंने पहली बार उसे देखा l वह इतनी ही सुंदर थी जितनी इस तरह की घटनाओं में किसी लड़की को सुंदर होने का हक होता है l और जैसा मैंने पहले कहा था कि प्यार में पढ़ने की मुझे जल्दी थी कि मैं बिना कुछ सोचे समझे उसके प्यार में पड़ गया l
वह मुझसे लगभग 5 साल छोटी थी l काफी क्यूट थी l मेरी जाति वाली थी इसलिए मुझे उसके प्यार में पढ़ना इतना खतरनाक नहीं लगा क्योंकि पहला तो यह कि उन दिनों ऑनर किलिंग क्या होती है यह मैं अखबारों के जरिए समझ चुका था और दूसरा यह कि मैं अपने माता-पिता को नाराज करने का रिस्क मोल नहीं ले सकता था l मध्यम वर्गीय जो ठहरा l
डर के इन सभी गणितो का ध्यान रखते हुए उसके प्यार में पढ़ना मुझे काफी मुनासिब लगा l वह सब इतना कैलकुलेटेड था कि यदि मेरी शादी उससे होती तो मैं इससे "अरेंज्ड लव मैरिज" कहता l
और फिर उसके प्यार में पढ़ते ही मेरा लिखना छूट गया l जो मैं पत्रकार बनकर दुनिया को बदलने की बड़ी-बड़ी बातें करता था, अब मैं एक बैंकर बनकर या इंजीनियर या ऐसी ही किसी प्रजाति का जंतु बनकर उसके साथ अपना परिवार बढ़ाना चाहता था l उसके प्यार में पागल होना चाहता था l मध्यमवर्गीय जो ठहरा l
इधर मेरे क्रांतिकारी दोस्त मुझे क्रांति पर लिखने के लिए फोन करते थे और मैं था कि उसके ख्यालों में खोया रहता था l मैंने लिखना बंद कर दिया था l
और फिर कुछ दिनों बाद उस लड़की के साथ प्यार का किस्सा ही खत्म हो गया l जैसे उस क्रांतिकारी की क्रांति का किस्सा वहीं कहीं खत्म हो गया था l
वह क्रांतिकारी दिल्ली में बैठकर अब भी शायद अपने पुराने दिनों को याद करता होगा पर उसे अब भी क्रांति मिलती होगी कि नहीं मुझे पता नहीं चलता l
पर मैं अब भी उस लड़की से मिलता हूं तो वह मुस्कुरा देती है l
- पंकज देवड़ा
और दूसरा यह कि मेरा पहनावा मेरा फैशन सेंस भिखारी होने की हद तक खराब था और कोई चाह कर भी मेरे प्यार में पागल नहीं हो सकता था l
इन सबके बीच, मैं लिखने लग गया था और फिर इस लिखने ने मेरी दोस्ती दो ऐसे क्रांतिकारियों से करवाई जो 2011 कि ठंड में तत्कालीन सरकार के खिलाफ क्रांति की गर्मी पैदा कर रहे थे l मैं उनके लिए लिखने लग गया था l
और फिर तीन चार महीनों बाद मेरे एक रिश्तेदार की शादी हुई और मैं वहां गया l मैंने पहली बार उसे देखा l वह इतनी ही सुंदर थी जितनी इस तरह की घटनाओं में किसी लड़की को सुंदर होने का हक होता है l और जैसा मैंने पहले कहा था कि प्यार में पढ़ने की मुझे जल्दी थी कि मैं बिना कुछ सोचे समझे उसके प्यार में पड़ गया l
वह मुझसे लगभग 5 साल छोटी थी l काफी क्यूट थी l मेरी जाति वाली थी इसलिए मुझे उसके प्यार में पढ़ना इतना खतरनाक नहीं लगा क्योंकि पहला तो यह कि उन दिनों ऑनर किलिंग क्या होती है यह मैं अखबारों के जरिए समझ चुका था और दूसरा यह कि मैं अपने माता-पिता को नाराज करने का रिस्क मोल नहीं ले सकता था l मध्यम वर्गीय जो ठहरा l
डर के इन सभी गणितो का ध्यान रखते हुए उसके प्यार में पढ़ना मुझे काफी मुनासिब लगा l वह सब इतना कैलकुलेटेड था कि यदि मेरी शादी उससे होती तो मैं इससे "अरेंज्ड लव मैरिज" कहता l
और फिर उसके प्यार में पढ़ते ही मेरा लिखना छूट गया l जो मैं पत्रकार बनकर दुनिया को बदलने की बड़ी-बड़ी बातें करता था, अब मैं एक बैंकर बनकर या इंजीनियर या ऐसी ही किसी प्रजाति का जंतु बनकर उसके साथ अपना परिवार बढ़ाना चाहता था l उसके प्यार में पागल होना चाहता था l मध्यमवर्गीय जो ठहरा l
इधर मेरे क्रांतिकारी दोस्त मुझे क्रांति पर लिखने के लिए फोन करते थे और मैं था कि उसके ख्यालों में खोया रहता था l मैंने लिखना बंद कर दिया था l
और फिर कुछ दिनों बाद उस लड़की के साथ प्यार का किस्सा ही खत्म हो गया l जैसे उस क्रांतिकारी की क्रांति का किस्सा वहीं कहीं खत्म हो गया था l
वह क्रांतिकारी दिल्ली में बैठकर अब भी शायद अपने पुराने दिनों को याद करता होगा पर उसे अब भी क्रांति मिलती होगी कि नहीं मुझे पता नहीं चलता l
पर मैं अब भी उस लड़की से मिलता हूं तो वह मुस्कुरा देती है l
- पंकज देवड़ा
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