तेरी सांसो की गीली सड़क पर,
हजार बार फिसला हूं मैं l
रोशनी की तो बात ही छोड़
तेरे अंधेरों के लिए भी तरसा हूं मैं l
अब बारिश बन गई है तो
तोड़ भी जा मेरी छाती l
देख यूं तिनकों की तरह,
घुटनों पर सिमटा हूं मैं l
हजार बार फिसला हूं मैं l
रोशनी की तो बात ही छोड़
तेरे अंधेरों के लिए भी तरसा हूं मैं l
अब बारिश बन गई है तो
तोड़ भी जा मेरी छाती l
देख यूं तिनकों की तरह,
घुटनों पर सिमटा हूं मैं l
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