लड़कियों को नहीं देखने का व्रत लिया था मैंने l उन 5 सालों के दौरान मिली पांच लड़कियों के भी चेहरे याद नहीं आते l
कभी कभी तो ऐसा होता था कि कॉलेज में कोई लड़की कहती कि मैं तुम्हारे साथ स्कूल में पढ़ती थी तो लगता था कि स्कूल के दिन किसी और जन्म की बात रहे होंगे l क्योंकि मैंने 15 से 19 की उम्र के बीच साधु बनने की ठानी थी और ब्रह्मचर्य इसकी पहली शर्त था l
मैं सुंदर मोक्ष की कामना करता था पर लड़कियों की सुंदरता से डरना चाहता था l
12वीं शुरू हुई थी l मैं उज्जैन की एक प्रसिद्ध कोचिंग पर मैथ्स पढ़ने गया l छूटा हुआ कोर्स पूरा करवाने के लिए असिस्टेंट लड़कियां पास बैठकर पढ़ाती थी l
वो उनमें से एक थी l जब वो पढ़ाती थी तो सवाल तो दूर सांस लेना भी याद नहीं रहता था l और अगर गलती से कोई सांस आती भी थी तो इतनी गर्म होती थी कि ब्रह्मचर्य का व्रत पिघल जाता था ,सन्यास की इच्छा पीछे छूटती जाती थी और कभी-कभी तो एक जन्म भी कम पढ़ने लग जाता था l
पसीने ऐसे छूटते थे कि लगता था कि शिप्रा का उद्गम मेरे ही सिर से हुआ होगा l
फिर कुछ हालात बने और कोचिंग छूट गई ब्रह्मचर्य बचा रह गया l और साल भर बाद ब्रह्मचर्य और मोक्ष दोनों की इच्छा छूट गई l
मुक्ति का बंधन टूट गया था, मैं मरना और फिर जन्मना चाहता था l मैं प्यार करना चाहता था l
और अब ऐसा होता है कि मोक्ष याद नहीं आता उसकी आंखें अब भी याद आती है l
कभी कभी तो ऐसा होता था कि कॉलेज में कोई लड़की कहती कि मैं तुम्हारे साथ स्कूल में पढ़ती थी तो लगता था कि स्कूल के दिन किसी और जन्म की बात रहे होंगे l क्योंकि मैंने 15 से 19 की उम्र के बीच साधु बनने की ठानी थी और ब्रह्मचर्य इसकी पहली शर्त था l
मैं सुंदर मोक्ष की कामना करता था पर लड़कियों की सुंदरता से डरना चाहता था l
12वीं शुरू हुई थी l मैं उज्जैन की एक प्रसिद्ध कोचिंग पर मैथ्स पढ़ने गया l छूटा हुआ कोर्स पूरा करवाने के लिए असिस्टेंट लड़कियां पास बैठकर पढ़ाती थी l
वो उनमें से एक थी l जब वो पढ़ाती थी तो सवाल तो दूर सांस लेना भी याद नहीं रहता था l और अगर गलती से कोई सांस आती भी थी तो इतनी गर्म होती थी कि ब्रह्मचर्य का व्रत पिघल जाता था ,सन्यास की इच्छा पीछे छूटती जाती थी और कभी-कभी तो एक जन्म भी कम पढ़ने लग जाता था l
पसीने ऐसे छूटते थे कि लगता था कि शिप्रा का उद्गम मेरे ही सिर से हुआ होगा l
फिर कुछ हालात बने और कोचिंग छूट गई ब्रह्मचर्य बचा रह गया l और साल भर बाद ब्रह्मचर्य और मोक्ष दोनों की इच्छा छूट गई l
मुक्ति का बंधन टूट गया था, मैं मरना और फिर जन्मना चाहता था l मैं प्यार करना चाहता था l
और अब ऐसा होता है कि मोक्ष याद नहीं आता उसकी आंखें अब भी याद आती है l
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