परियों की जगह गेहूं की कथाएं सुनाएं जाने लगी थी l इंजीनियर से किसान बने उस बूढ़े को अब भी यकीन नहीं होता था कि धरती ने गेहूं की फसल उगाना बंद कर दिया है l
उसकी बूढ़ी पत्नी की हथेलियों में गेहूं की खुशबू आती थी l वह जब तक जिंदा थी, बूढ़ा उसकी हथेलियों को हर रोज सूंघता था और गेहूं के स्वाद को अपनी स्मृति में बचाए रखने की कोशिश करता था l
उसका पहला चुंबन भी उसे सिर्फ इसलिए याद नहीं आता कि वह काफी रूमानियत भरा था बल्कि इसलिए याद आता था कि वह गेहूं के खेतों में घटित हुआ था l
जब उसकी पहली प्रेमिका के आग्रह पर उसने उसे चूमा था तो उसके कानो मैं इतनी जोर से सीटी बजी थी कि उसे गेहूं के खेत में हवाओं के सर्राटा लगाकर दौड़ने की आवाज भी नहीं आई थी l
उसे अब अब लगने लग गया था कि उसकी स्मृति में प्रेमिका का चेहरा जैसे धुंधला गया है परंतु गेहूं की बालियां अभी भी उतनी ही सुनहरी और ताजी है l
बाकी लोगों की तरह उसे वैज्ञानिकों का बनाया हुआ सिंथेटिक फूड खाना पसंद नहीं था और उसे लगता था कि जैसे पिछले 37 साल से उसका पेट भरा नहीं है l
उसे लगने लग गया था कि भूख उसके पेट में एक पौधे की तरह उग रही थी जो एक दिन बड़ी होकर उसके शरीर को फाड़ डालेगी l
उसकी बूढ़ी पत्नी की हथेलियों में गेहूं की खुशबू आती थी l वह जब तक जिंदा थी, बूढ़ा उसकी हथेलियों को हर रोज सूंघता था और गेहूं के स्वाद को अपनी स्मृति में बचाए रखने की कोशिश करता था l
उसका पहला चुंबन भी उसे सिर्फ इसलिए याद नहीं आता कि वह काफी रूमानियत भरा था बल्कि इसलिए याद आता था कि वह गेहूं के खेतों में घटित हुआ था l
जब उसकी पहली प्रेमिका के आग्रह पर उसने उसे चूमा था तो उसके कानो मैं इतनी जोर से सीटी बजी थी कि उसे गेहूं के खेत में हवाओं के सर्राटा लगाकर दौड़ने की आवाज भी नहीं आई थी l
उसे अब अब लगने लग गया था कि उसकी स्मृति में प्रेमिका का चेहरा जैसे धुंधला गया है परंतु गेहूं की बालियां अभी भी उतनी ही सुनहरी और ताजी है l
बाकी लोगों की तरह उसे वैज्ञानिकों का बनाया हुआ सिंथेटिक फूड खाना पसंद नहीं था और उसे लगता था कि जैसे पिछले 37 साल से उसका पेट भरा नहीं है l
उसे लगने लग गया था कि भूख उसके पेट में एक पौधे की तरह उग रही थी जो एक दिन बड़ी होकर उसके शरीर को फाड़ डालेगी l
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